Thursday, March 6, 2008

मंदी की गिरफ्त से निकले शेयर बाजार

मुम्बई। सूचना प्रौद्योगिकी, एफएमसीजी, धातु और तेल गैस कम्पनियों को मिले समर्थन से देश के शेयर बाजार आज पिछले तीन दिन की तगड़ी गिरावट से ऊबरने में सफल रहे। मुम्बई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स 202.19 अंक तथा राष्ट्रीय शेयर बाजार (एनएसई) का निफ्टी 57.15 अंक ऊपर बंद हुआ।

सत्र की शुरुआत में विदेशी बाजारों का अनुसरण करते हुए यहां भी गिरावट का रुख था, किंतु उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में पिछले चार दिन से चली रही गिरावट थम गई।


वित्तमंत्री पी.चिदम्बरम ने उद्योगपतियों की बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि कि करों में कमी और आयकर में छूट की सीमा बढ़ाए जाने से उपभोक्ताओं की जेब में आने वाले पैसे से खर्च के लिए अधिक पैसा उपलब्ध होने से आगामी वित्त वर्ष में देश की आर्थिक विकास दर में कम से कम 8.8 प्रतिशत बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

सत्र की शुरुआत में सेंसेक्स कल के 16,339.89 अंक की तुलना में 16,328.91 अंक पर खुला और जल्दी ही मंदा और बढ़ गया। नीचे में 16,253.02 अंक तक लुढ़कने के बाद ऊंचे में यह 16,595.64 अंक तक चढ़ा और समाप्ति पर कुल 202.19 अंक अर्थात 1.24 प्रतिशत के फायदे से 16,542.08 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स में बढ़त के बावजूद बीएसई के मिडकैप और स्मॉलकैप के सूचकांकों में क्रमशः 68.05 तथा 143.49 अंक का नुकसान हुआ।


एनएसई का निफ्टी ऊपर में 4,936.75 अंक तक बढ़कर समाप्ति पर कुल 57.15 अंक अर्थात 1.17 प्रतिशत के लाभ से 4,921.40 अंक पर बंद हुआ।

विदेशी बाजारों में हांगकांग, जापान और ऑस्ट्रेलिया के शेयर बाजार नीचे रहे, जबकि पाकिस्तान में कराची शेयर बाजार के सूचकांक में बढ़ोतरी दर्ज की गई।


मिडकैप और स्मॉलकैप में गिरावट के चलते बीएसई का रुख नकारात्मक रहा। सत्र में कुल 2,750 कम्पनियों के शेयरों में कामकाज हुआ और इसमें से 70.22 प्रतिशत अर्थात 1,931 में नुकसान रहा जबकि 769 अर्थात 27.96 प्रतिशत कम्पनियों के शेयर ऊपर थे। मात्र पचास कम्पनियों के शेयर में कोई घटबढ़ नहीं हुई। सेंसेक्स में 200 अंक से अधिक की उछाल के बावजूद इसमें शामिल तीस कम्पनियों में से 11 के शेयरों में नुकसान हुआ।

सेंसेक्स की फायदे वाली श्रेणी में सर्वाधिक बढ़त सूचना प्रौद्योगिकी वर्ग की चौथी बड़ी कम्पनी सत्यम कम्प्यूटर के शेयर में 6.70 प्रतिशत रही। कम्पनी का शेयर सवा सत्ताईस रुपए बढ़कर 433.80 रुपए पर पहुंच गया। इस वर्ग की अग्रणी टीसीएस, दूसरी बड़ी इन्फोसिस टेक्नोलॉजिस और विप्रो के शेयर भी अच्छे फायदे में रहे।

आईटीसी लिमिटेड, एचडीएफसी, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, मारुति सुजुकी, ओएनजीसी, टाटा स्टील, रिलायंस कम्युनिकेशंस, एनटीपीसी, रिलायंस एनर्जी, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, सिप्ला लिमिटेड, रैनबैक्सी लैबोरेट्रीज, अम्बुजा सीमेंट, डीएलएफ और टाटा मोटर्स के शेयर फायदे वालों में शामिल थे।


नुकसान वाली सूची में दुपहिया वर्ग की दूसरी बड़ी कम्पनी बजाज ऑटो का शेयर 3.26 प्रतिशत अर्थात 71.80 रुपए घटकर 2,128.05 रुपए रह गया। रिलायंस एनर्जी में 1,459.45 रुपए पर 3.01 प्रतिशत अर्थात 45.30 रुपए निकले। आईसीआईसीआई बैंक का शेयर आज लगातार दूसरे दिन भारी उठापटक के बीच 1.15 प्रतिशत अर्थात 11.20 रुपए और गिरकर 960.40 रुपए का रह गया।

भारती एयरटेल, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा, एचडीएफसी बैंक, हिन्दुस्तान यूनिलीवर, एसबीआई, भेल, एलएंडटी और एसीसी भी नीचे आए।

Tuesday, March 4, 2008

अमेरिकी मंदी भारतीय आईटी क्षेत्र के लिए मौका

वाशिंगटन। अमेरिका में जारी आर्थिक संकट डॉलर के कमजोर पड़ने के कारण पहले से ही मुश्किलों का सामना कर रहे भारतीय आईटी उद्योग के लिए चुनौती तो है लेकिन इसे इस क्षेत्र के लिए एक अवसर के रुप में भी देखा जा सकता है।

एनआईआईटी टेक्नोलॉजिज लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरविंद ठाकुर ने न्यूयॉर्क से टेलीफोन पर आईएएनएस से एक बातचीत में कहा, “इससे हम लोग एक बार फिर 2000-2001 वाली स्थिति में पहुंच जाएंगे।


ठाकुर ने कहा कि आर्थिक संकट के कारण कुछ खास क्षेत्रों को फायदा होगा। उनका कहना था कि सस्ते में अपनी सेवाएं उपलब्ध कराकर इससे आईटी उद्योग भी अपना व्यापार बढ़ा सकता है।

उल्लेखनीय है कि लगभग 14 करोड़ अमेरिकी डॉलर के वार्षिक आय वाली कम्पनी एनआईआईटी के विदेशों से होने वाली कुल आय का 30 प्रतिशत हिस्सा उत्तरी अमेरिका से आता है।


ठाकुर का कहना था कि डॉलर के मुकाबले रुपए की 14 प्रतिशत की मजबूती ने निर्यात करने वाली भारतीय कम्पनियों के मुनाफे पर जबर्दस्त नकारात्मक असर डाला है। उन्होंने कहा, “कमजोर होते डॉलर से बड़ी चुनौती पेश हो रही है।

ठाकुर ने कहा कि कमजोर होते डॉलर से उत्पन्न हुई स्थिति से निपटने के लिए हमें अपनी कार्यप्रणाली और रणनीति में परिवर्तन लाना होगा और उत्पादन मूल्य कम करना होगा। यदि हम ऐसा कर पाने में सक्षम होते हैं तो बेशक अमेरिकी संकट हमारे लिए एक अवसर है।

Wednesday, February 20, 2008

शेयर बाजार गिरावट पर खुले

एशियाई शेयर बाजारों से संकेत लेते हुए देश के शेयर बाजार काफी कमजोर खुले और अब इनमें गिरावट बढ़ गई है। फिलहाल सेंसेक्स 287 और निफ्टी 89 अंक की गिरावट पर हैं।

इस समय बैंकिंग, पूंजीगत वस्तु और अचल सम्पत्ति क्षेत्र में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट है। टिकाऊ उपभोक्ता, एफएमसीजी, तेल व गैस, ऊर्जा और पीएसयू सूचकांकों में एक प्रतिशत से ज्यादा की नर्मी है। लेकिन रुपए के कमजोर होने की कारण आईटी क्षेत्र तेजी दिखा रहा है। बीएसई पर यह अकेला क्षेत्र है जो मजबूत खड़ा है।

सेंसेक्स में शामिल तीस शेयरों में से सत्यम कम्प्यूटर्स, इंफोसिस, विप्रो, हिंडाल्को, रैनबैक्सी, टीसीएस, रिलायंस एनर्जी, महिन्द्रा एंड महिन्द्रा और बजाज ऑटो के शेयर तेजी पर हैं। गिरने वाले शेयरों में एचडीएफसी बैंक, रिलायंस कम्युनिकेशन, भेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, एचडीएफसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एनटीपीसी, आईटीसी और टाटा मोटर्स के शेयर शामिल हैं।

सुबह 10:35 बजे

मुम्बई शेयर बाजार का सेंसेक्स सूचकांक 17,758.36 के स्तर पर 287.30 अंक नीचे और राष्ट्रीय शेयर बाजार का निफ्टी 5,191.25 के स्तर पर 89.55 अंक नीचे कारोबार कर रहा है।

शुरुआती कारोबार में बैंकिंग, पूंजीगत वस्तु और ऑटो क्षेत्र में कमजोरी आई है। आज भारती एयरटेल, सेल, भेल, एबीबी, ग्रासिम, एनटीपीसी, सिप्ला के शेयर गिरावट पर खुले हैं।

मिडकैप व स्मॉलकैप सूचकांक भी काफी गिरावट पर हैं।

लेकिन दूसरी ओर रुपए के कमजोर होने की खबरों के बीच आईटी व तकनीकी क्षेत्र के शेयर बढ़त पर हैं। यहां सत्यम, इंफोसिस, विप्रो, टीसीएस के शेयर तेजी दिखा रहे हैं।

सुबह 9:56 बजे

मुम्बई शेयर बाजार का सेंसेक्स सूचकांक 17,45.65 के स्तर पर 130.01 अंक नीचे और राष्ट्रीय शेयर बाजार का निफ्टी 5,236.00 के स्तर पर 44.80 अंक नीचे कारोबार कर रहा है।

Thursday, February 14, 2008

बाजार की अस्थिरता कुछ माह चलेगी

मॉर्गन स्टैनले के प्रबंध निदेशक और ईक्विटी उप प्रमुख रिद्धम देसाई का मानना है कि बाजार की अस्थिरता कुछ महीने तक जारी रहेगी। अमेरिकी आंकड़े बाजार को कोई दिशा नहीं दे रहे हैं।

मॉर्गन स्टैनले के प्रबंध निदेशक और ईक्विटी उप प्रमुख पराग गुड़े ने कहा कि छः महीने पहले भारत की स्थिति दुनिया के बाजारों से अलग थी, लेकिन अब अगर वैश्विक बाजारों में मंदी की स्थिति बनी रहती है तो भारत भी उससे प्रभावित होगा।

बाजार ने संसद को भी हिलाया
अगले छः महीने ईक्विटी की दुनिया के लिए कैसे दिख रहे हैं?
वैश्विक स्तर पर काफी अनिश्चितताएं देखी जा रही है। मुझे लगता है कि अमेरिकी डाटा बाजार को स्पष्ट दिशा नहीं दे रहे हैं। अमेरिका की साख की समस्या सुलझती नहीं दिख रही है। फेडरल रिजर्व ने इससे निपटने के लिए बड़े कदम भी उठाए। लेकिन इन सबके बावजूद अस्थिरता थमती नजर नहीं आ रही है और यह अगले कुछ और महीने तक देखने को मिल सकती है।

सेंसेक्स में 12,700 का स्तर भी सम्भव

वैश्विक स्तर पर तरलता की कमी देखा जा रही है। उभरते बाजारों में लगातार बिकवाली देखी जा रही है। मॉर्गन में अपने संस्थागत क्लायंट से बात करने से आपको इसके पीछे क्या वजह लगती है?

छः महीने पहले भारत की स्थिति दुनिया के दूसरे बाजारों से बिल्कुल अलग थी लेकिन अगर वैश्विक स्तर पर मंदी की स्थिति कायम रहती है तो इससे भारत भी प्रभावित होगा।

आंकड़े बताते हैं कि पहले महीने में विदेशी निवेशकों ने जमकर बिकवाली की। लेकिन हाल के स्तर से बाजार का नीचे का स्तर क्या होगा यह कहना मुश्किल है।

Friday, February 8, 2008

बाजार और नीचे जा सकता है

अगर पूंजी का अंतर्वाह नहीं होता है तो बजट के होने या न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। तकनीकी रुप से बाजार सही स्थिति में है। बाजार में पिछले सेटलमेंट से इस सेंटलमेंट में फ्यूचर पोजिशन काफी कम है। पहले के मुकाबले सूचकांको के मूल्यांकन 25 फीसदी तक सस्ते हैं। लेकिन यह व्यर्थ हैं अगर विदेशी निवेश नहीं आते हैं।

शेयर बाजार में आज

(वार्ता) चौतरफा बिकवाली का दबाव रहने से आज लगातार दूसरे दिन देश के शेयर बाजारों को जोरदार झटका लगा। मुम्बई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स 626 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 189.30 अंक टूट गए।

कारोबारियों के अनुसार अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मंदी की चिंता के बीच वहां के शेयर बाजारों में कल लगातार दूसरे दिन गिरावट का रुख और यहां चालू वित्त वर्ष के लिए पहले त्वरित अनुमानों में जीडीपी पिछले साल की तुलना में करीब एक प्रतिशत घटकर 8.7 प्रतिशत रह जाने की सम्भावना ने निवेशकों को और निराश किया। एशिया के शेयर बाजारों जापान को छोड़कर अन्य में अवकाश था। हालांकि जापान के निक्केई में 12,972.55 अंक पर 107.91 अंक अर्थात 0.8 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखा। यूरोप के शेयर बाजार भी कारोबार की शुरुआत में नीचे खुले हैं।

Thursday, January 31, 2008

एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुख

अमेरिका में मंदी का खतरा एशियाई बाजारों के लिए भारी पड़ रहा है। आज शुरुआती कारोबार एशियाई बाजार करीब डेढ़ प्रतिशत तक गिरकर खुले। लेकिन उसके बादा यहां तेज वापसी देखने को मिली।

कुल मिलाकर एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुझान है। कहीं हल्की गिरावट है तो कहीं हल्की तेजी है। यानी यहां से कुछ साफ संकेत नहीं मिल रहे हैं।

Wednesday, January 23, 2008

आखिर क्यों धराशायी हुआ शेयर बाजार?

नई दिल्ली : देश के शेयर बाजार ने सोमवार को इतिहास रचा। सेंसेक्स में एक दिन में 1408 पॉइंट की गिरावट दर्ज की गई। एक दिन में कारोबारियों को छह लाख करोड़ रुपये का घाटा हो गया। यह पहला मौका था जब सेंसेक्स के सभी 30 शेयरों में गिरावट आई। मंगलवार भी सेंसेक्स के लिए अमंगल साबित हुआ। बाजार खुलते ही गिरा। लोअर सर्किट के कारण इसे बंद करना पड़ा। दो ही दिनों में सेंसेक्स 19,000 से गिरकर 16,000 के नीचे आ पहुंचा। वित्त मंत्री के आश्वासनों के बावजूद निवेशकों का बाजार पर से भरोसा गायब हो गया है।

यूं तो किसी भी गिरावट की सैद्धांतिक वजह एक ही होती है कि बाजार से खरीदार कम और बेचने वाले ज्यादा हो जाएं। सोमवार और मंगलवार को यही हुआ। लेकिन इसके अलावा भी कुछ वजहें हैं , जो इस गिरावट के लिए जिम्मेदार हैं।

वर्ल्ड वाइड मंदी की आशंका

देश के शेयर बाजारों में गिरवाट का जो सबसे बड़ा कारण है वह है अमेरिका और ईस्ट एशिया में आए मंदी के लक्षण। अब देखते हैं कि आखिर ये कैसे बाजार को प्रभावित कर रहे हैं ? भारतीय शेयर बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों का दबदबा बहुत अधिक बढ़ गया था। पहले से ही ऐसी आशंका जताई जा रही थी कि अगर विदेशी संस्थागत निवेशकों ने अपना पैसा खींच लिया तो शेयर बाजारों में उथल-पुथल हो सकती है और हुआ भी यही।

भारतीय शेयर बाजारों में तेजी का दौर जारी था और निवेशक जबर्दस्त लाभ में चल रहे थे। यहां के संस्थागत विदेशी निवेशकों में बड़ी संख्या में अमेरिकी हैं। अमेरिका और ईस्ट एशिया में आई मंदी के लक्षण को देखकर ये डर गए। हालांकि , इस मंदी क्या असर पड़ेगा अभी कुछ कहा नहीं जा सकता पर इन्हें लग रहा है कि कहीं मंदी पूरी दुनिया को अपनी चपेट में न ले ले। वैसी स्थिति में भारत भी इससे अछूता नहीं रह सकता है। यह सब देखकर निवेशकों को लगा कि यही मौका है कि अपने लाभ को भारतीय मार्केट्स से कैश करा लिया जाए और उन्होंने बिकवाली शुरू कर दी। चूंकि मार्केट में उनकी भागीदारी काफी अधिक है , इसलिए उनकी हलचल का असर भी सबसे अधिक पड़ता है।

घरेलू निवेशक

विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली से भारतीय निवेशक भी घबराकर बाजार से पैसा निकालने लगते हैं , जिस कारण बाजार और गिर जाता है। और फिर गिरने का सर्कल बन जाता है। यह उथल-पुथल का दौर 3-4 दिन चलता है। उसके बाद बाजार कुछ दिन ठहरेगा। फिर एक बार उथल-पुथल का दौर रहेगा। उसके कुछ दिन बाद बाजार सामान्य ढंग से चलने लगेगा।

इसके अलावा , तेजी के दौर में बड़ी संख्या में ऐसे सट्टेबाज बाजार में आ जाते हैं जो रातोरात अमीर बन जाना चाहते हैं। इनमें अधिकतर कर्ज लेकर इन्वेस्ट करते हैं। जब बाजार गिरने लगता है तो ये सबसे पहले पैसा समेट कर भाग जाना चाहते हैं। ये हड़बड़ी में बिकवाली करते हैं , जिससे बाजार और अधिक गिर जाता है।

बड़े आईपीओ

हालांकि ये बहुत अधिक प्रभावित नहीं करते हैं , लेकिन जब बाजार में बिकवाली का दौर हो तो यह बाजार डुबाने में और सहयोगी साबित होते हैं। चूंकि लोग पहले से ही पैसा लगा चुके होते हैं , इसलिए बाजार में पैसे की कमी हो जाती है , जिसका असर नए निवेश पर पड़ता है।

गिरावट को रोकने का उपाय

बाजार को गिरने से रोकने का उपाय अब सरकार ही कर सकती है। चूंकि संस्थागत निवेशकों का स्टॉक काफी बड़ा होता है इसलिए उनकी कमी की भरपाई रिटेल इन्वेस्टर्स नहीं कर सकते हैं। इसके लिए संस्थागत घरेलू निवेशकों की जरूरत पड़ेगी। इन घरेलू संस्थागत निवेशकों की मदद से सरकार मार्केट्स की गिरावट को थाम सकती है।

रिटेल इन्वेस्टरों के लिए मौका

अभी बाजार के गिरने का सबसे अधिक फायदा रिटेल इन्वेस्टरों को होगा। इस वक्त सस्ती कीमतों पर पर्याप्त शेयर बाजार में मौजूद होंगे। इस वक्त जो भी निवेशक सोच समझकर खरीदारी करेगा वह फायदे में रहेगा। जरूरत है सस्ते में शेयर खरीद कर कुछ इंतजार करने की। बहुत जल्दबाजी नहीं दिखाएं। कुल मिलाकर देखें तो इस गिरावट ने छोटे निवेशकों के लिए लाभ कमाने का नया रास्ता खोल दिया है।