अंतराष्ट्रीय शेयर बाज़ार में बिकवाली का असर भारितीय शेयर बाज़ार पर पड़ा जिसके कारण आज भारतीय शेयर बाज़ार में कमजोरी का माहोल है। फिलहाल सेंसेक्स 228 और निफ्टी 56 अंक कि गिरावट पर कारोबार कर रहा है। बीएसई पर मिडकैप व स्मालकैप सूचकांक भी आधे फीसदी नीचे है ।
आईटी क्षेत्र एक फीसदी ऊपर है । इसके अलावा फार्मा और तकनीकी क्षेत्र में भी हलकी तेज़ी है। यहाँ धातु , उर्जा क्षेत्र और अय्र्टेल क्षेत्र दो फीसदी से ज्यादा गिरावट पर है। वाहन और उपभोक्ता टिकाऊ में भी एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट है।
Monday, May 26, 2008
भारतीय शेयर बाजारों में कमजोरी का माहोल - May 26, 2008
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Tuesday, May 20, 2008
भारतीय शेयर बाज़ार गिरावट पर है - May 20, 2008
अंतराष्ट्रीय शेयर बाजारों से संकेत लेकर भार्तिये शेयर बाज़ार आज गिरावट पर खुले है। ज्यादातर शेयर आज गिरावट पर खुले है । हलाकि मिडकैप व स्मालकैप सूचकांक भी गिरावट पर है।
कल अमेरिकी बाज़ार में भी बढ़त थी। जबकि डाऔ ऊपर था और नैस्देक गिरावट पर बंद हुए थे । आज चीन और सिंगापूर के बाज़ार बढ़त पर है, दूसरी ओर एशियाई शेयर बाजारों में ज्यादातर शेयर गिरावट पर है।
इस समय धातु क्षेत्र बढ़त दिखा रहा है ।
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Labels: नैस्देक, भारतीय शेयर बाज़ार
Friday, February 15, 2008
सबसे अधिक नुकसान उठाने वालों में भारत भी
भारतीय शेयर बाजारों के लिए इस साल की शुरुआत अच्छी नहीं रही। सभी उदीयमान बाजारों की बात की जाए तो जनवरी 2008 में भारत चौथे सबसे खराब प्रदर्शन वाले शेयर बाजार के रूप में सामने आया है। यह उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में शेयर बाजारों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले देशों में से एक भारत भी था।
वित्तीय बाजार डाटा प्रदाता स्टैंडर्ड एंड पुअर्स (एसएंडपी) ने विश्व शेयर बाजारों के बारे में अपने मासिक अपडेट में यह निष्कर्ष निकाला है। इसमें कहा गया है कि अगर निवेशक यह सोचते हैं कि बाजार केवल चढ़ेगा ही तो जनवरी उनके लिए भ्रम तोड़ने वाला महीना रहा और उन्हें वास्तविकता के धरातल पर ले आया।
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Wednesday, January 30, 2008
सेबी विदेशी निवेश स्थिरता को सुधारे
शेयर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की स्थिरता में सुधार करने की जरूरत है।
यह बात फिक्की तथा अर्न्स्ट एंड यंग के एक अध्ययन में कही गयी है।
अध्ययन में कहा गया घरेलू पूंजी बाजार विशेषकर इक्विटी बाजार ने विदेशी पोर्टफोलियो प्रवाह पर निर्भरता का प्रदर्शन किया है।
प्रवाह बढ़ रहा है तो बाजार में उतार चढ़ाव की संभावना भी बढ़ गयी है।
नियामक को इस प्रवाह की स्थिरता सुधारने के लिए कदम उठाने चाहिए।
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Labels: निवेश, भारतीय शेयर बाज़ार, विदेशी पोर्टफोलियो
