नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक(आरबीआई) के सीआरआर में 0.5 प्रतिशत का इजाफा करने के निर्णय के बाद भी बैंकें ब्याज दरों में वृद्धि नहीं करेंगी। देश की दो सबसे बड़ी बैंकों ने कहा है कि ने कहा कि वे इस बढ़े सीआरआर को आसानी से पचा सकते हैं। इसके लिए ब्याज दरों में वृद्धि करने की नौबत नहीं आएगी। एसबीआई के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक ओपी भट्ट ने कहा कि उनकी बैंक मौजूदा दरों में कोई परिवर्तन नहीं करेगी। इसके बाद भी बैंकें अपने स्तर पर ब्याज दर बढ़ाने या फिर घटाने का निर्णय ले सकती हैं।
देश की सबसे बड़ी प्रायवेट बैंक आईसीआईसीआई के संयुक्त प्रबंधन निदेशक चड्ढा कोचर ने बताया कि इतनी सीआरआर दर में बढ़ोतरी से बैंकों के लिए धन की उपलब्धता में कोई अंतर नहीं आएगा। इससे ब्याज दरों में कोई परिवर्तन नहीं होना चाहिए।
रिजर्व बैंक की यह पॉलिसी पिछली तीमाही के वित्तीय घटनाक्रमों पर आधारित है, जहां अतिरिक्त तरलता के कारण समस्या उत्पन्न हुई थी।
हालांकि यह खुद बैंकों को तय करना था कि वे सरप्लस 15,000 करोड़ रुपए की धनराशि कहां खर्च करनी थी।
भट्ट ने कहा कि भले ही इस समय देश में मुद्रास्फीति पूरी तरह से नियंत्रित है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बढ़ी तेल की कीमतें और घरेलू बाजार में खाद्यान्नों की कीमतें इस डगमगा सकती हैं।
Wednesday, October 31, 2007
ब्याज दरें नहीं बढ़ेंगी
सीआरआर बढ़ाने की वजह अतिरिक्त तरलता
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने मंगलवार को रिजर्व बैंक द्वारा सीआरआर की दर बढ़ाने का समर्थन करते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करना है। इसके साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई की विकास की दर केंद्रीय बैंक की आपेक्षित दर 8.5 प्रतिशत को पार कर जाएगी।
चिदंबरम ने कहा कि रिजर्व बैंक ने अपनी इस मिड टर्म मानेटरी पॉलिसी में पिछली पालिसी की नीतियों को ही आगे बढ़ाया है। हालांकि इस बार अतिरिक्त तरलता के कारण बैंकों को हो रही समस्या को दूर करने के लिए सीआरआर की दर को 0.5 प्रतिशत बढ़ाया है।
उन्होंने कहा, मुझे उम्मीद है कि बैंकें इसके वास्तविक कारण को सकारात्मक ढंग से लेंगी। केंद्रीय बैंक पहले ही कह चुकी है वैश्विक और घरेलू स्तर पर बदली परिस्थितियों के अनुसार वह शार्ट टर्म, लांग टर्म और मिड टर्म उपायों की घोषणा कर सकती है।
वित्त मंत्री ने कहा कि रिजर्व बैंक अतिरिक्त तरलता को तत्काल सोख लेना चाहती है। उन्होंने रीयल ऐस्टेट की कीमतों पर कहा कि यहां कीमतों में हल्का इजाफा ही हुआ है। हालांकि इसके बाद भी इस क्षेत्र में मांग पर कोई असर नहीं पड़ा है।
उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए आर्थिक विकास की दर के 8.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, लेकिन वे इससे ज्यादा की उम्मीद कर रहे हैं।
डॉलर को मजबूत रखेगा अमेरिका-पालसन
नई दिल्ली- अमेरिका के वित्त मंत्री हेनरी पालसन ने मंगलवार को कहा कि उनका देश अमेरिकी मुद्रा डॉलर को मजबूत रखने के लिए कटिबद्ध है।
पालसन ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मैं डॉलर की मजबूती के लिए मजबूती के साथ प्रतिबद्ध हूँ। पालसन ने कहा कि अमेरिका का वित्तीय बाजार वहाँ जोखिम भरे आवास ऋण के संकट से उबर रहा है।
रिजर्व बैंक ने सीआरआर बढ़ाई
मुंबई- रिजर्व बैंक ने अर्थतंत्र में मौद्रिक तरलता की लगातार वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए बैंकों का नकद सुरक्षित अनुपात (सीआरआर) आधा प्रतिशत बढ़ाते हुए इसे 7.5 प्रतिशत कर दिया।
बैंक दर, रेपो और रिवर्स रेपो दर में कोई फेरबदल नहीं किया गया है। सीआरआर में आधा प्रतिशत की वृद्धि 10 नवंबर से शुरु होने वाले पखवाड़े से लागू होगी।
वर्ष 2007-08 की वार्षिक ऋण एवं मौद्रिक नीति की अर्धवार्षिक समीक्षा जारी करते हुए रिजर्व बैंक गवर्नर वाईवी रेड्डी ने कहा है कि यदि कच्चे तेल के दाम और नहीं बढ़ते हैं और घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में कोई बड़ा उलटफेर यदि नहीं होता है तो जीडीपी की विकास दर 8.5 प्रतिशत पर रहने का पुर्वानुमान कायम रहेगा।
रेड्डी ने सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंकों के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशकों के साथ बैठक में मौद्रिक नीति की अर्धवार्षिक समीक्षा पर विचार-विमर्श किया। इसमें मुद्रास्फीति को 4 से 4.5 प्रतिशत के दायरे में लाने के प्रयास करते हुए 5 प्रतिशत के दायरे में नियंत्रित रखने का जिक्र किया गया है।
बैंक ने अर्थतंत्र में नकदी प्रसार में वृद्धि को 17 से 17.5 प्रतिशत के बीच रखने का लक्ष्य तय किया हुआ है जबकि 12 अक्टूबर 2007 को इसमें 21.8 प्रतिशत वृद्धि की रफ्तार बनी हुई थी।
इस पर और अंकुश लगाने के लिए बैंक ने सीआरआर आधा प्रतिशत बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया। केन्द्रीय बैंक के इस कदम से बैंकों की अरबों रुपए की नकदी रिजर्व बैंक के खजाने में चली जाएगी।
मौद्रिक समीक्षा में बैंक ने कहा है कि थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति की दर अप्रैल 2006 के 6.4 प्रतिशत के मुकाबले 13 अक्टूबर 07 को घटकर 3.1 प्रतिशत रह गई।
बैंकों में इस दौरान जमा राशि में वृद्धि 20 प्रतिशत के मुकाबले इस साल 25 प्रतिशत बढ़कर 5,69,061 करोड़ रुपए रही, जबकि बैंकों की वितरित कर्ज राशि इस साल कुछ धीमी पड़कर 23.3 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।
Tuesday, October 30, 2007
तेज विकास बना रहेगा
भारत का आर्थिक विकास 8.5 प्रतिशत से ऊपर बना रहेगा और वित्त वर्ष 2008 तक सकल घरेलू विकास दर नौ प्रतिशत के ऊपर हो जाएगी। वित्तमंत्री ने एक बार फिर यह बात ‘यूएस इंडिया सीईओ फोरम’ में दोहराई है।
देश के बुनियादी क्षेत्र (इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर) में हो रहे निवेश को लेकर हुए इस सम्मेलन में वित्त मंत्री ने कहा कि देश का बुनियादी विकास सकल घरेलू विकास को पीछे छोड़ रहा है।
एनटीपीसी को 1,925 करोड़ का लाभ
नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी बिजली कम्पनी एनटीपीसी लिमिटेड ने सितम्बर में समाप्त वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में 1,925.49 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा अर्जित किया जो कि पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 30.64 प्रतिशत अधिक रही।
एनटीपीसी की यहां जारी विज्ञप्ति के अनुसार जुलाई से सितम्बर 2007 की दूसरी तिमाही में कम्पनी का बिक्री कारोबार पिछले साल की इसी अवधि के 7,724.30 करोड़ रुपए से बढ़कर 8,016.86 करोड़ रुपए हो गया जबकि अप्रैल से सितम्बर की छमाही अवधि में कुल बिक्री कारोबार 11.54 प्रतिशत बढ़कर 16,975.67 करोड़ रुपए हो गया।
तिमाही मुनाफा 30.6 प्रतिशत बढ़कर 1,925.49 करोड़ रुपए हो गया जबकि छमाही अवधि में कम्पनी ने कुल 4,295.42 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा अर्जित किया जो कि पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में करीब 42 प्रतिशत अधिक रहा।
कम्पनी के कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों की कार्यक्षमता इस दौरान 85.12 प्रतिशत से सुधरकर 88.63 प्रतिशत हो गई।
शेयर बाजार: कहां छिपा है पैसा?
एलएंडटी में निवेश करें
प्रभुदास लीलाधर की शर्मिला जोशी का लार्सन एंड टूब्रो के प्रति नजरिया सकारात्मक है।
जोशी ने ‘सीएनबीसी-टीवी18’ को बताया, “एलएंडटी के आंकड़े काफी अच्छे थे और हमारे विश्लेषण के मुताबिक कम्पनी की आय आगे भी अच्छे रहेंगे। अगर आप एलएंडटी के हाल के स्तर को देखकर इसके मार्जिन में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं तो हमें यह जरुर देखना चाहिए कि कम्पनी के दूसरी तिमाही के नतीजे शानदार थे।
उन्होंने कहा, “यह एक ऐसा स्टॉक है जहां मैं निवेश करना पसंद करूंगी। अगर आप कम्पनी की आय पर नजर डालेंगे तो आप निश्चित तौर पर इस स्टॉक में निवेश करना पसंद करेंगे। कम्पनी के सभी व्यवसाय अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। इसलिए आय प्रत्यक्षता काफी अच्छी है। ऐसे में कोई भी निवेशक इस स्टॉक में निवेश करना पसंद करेगा।”
रिलायंस पेट्रोलियम लम्बे समय का शेयर
डायमेंशन कंसल्टिंग के अजय श्रीवास्तव का मानना है कि निवेशकों को रिलायंस पेट्रोलियम के साथ लम्बी अवधि के लिए बने रहना चाहिए।
श्रीवास्तव ने ‘सीएनबीसी-टीवी18’ को बताया, “रिफाइनरी क्षेत्र में वास्तविक रुप से रुचि बनती दिख रही है। जिन निवेशकों ने आईपीओ के दौरान इस स्टॉक में निवेश किया था और आज भी बने हुए हैं उन्हें काफी अच्छा रिटर्न मिला है और जिन्होंने इसमें ऊपरी स्तर पर निवेश किया था, उन्हें 10-15 प्रतिशत का रिटर्न आसानी से मिल सकता है।”
उन्होंने आगे कहा, “तीन से चार महीने की अवधि में यह 230-240 रुपए के स्तर को छू लेगा। लेकिन अगर निवेशक इस स्टॉक से अच्छे मुनाफे की उम्मीद कर रहे हैं तो उन्हें लम्बी अवधि के लिए इस स्टॉक के साथ बने रहना चाहिए।”
आरएनआरएल में 102 के स्तर पर प्रवेश करें
अन्नाग्राम स्टॉक ब्रोकिंग के वी.के.शर्मा का कहना है कि रिलायंस नैचुरल रिसोर्सेस (आरएनआरएल) में 102 रुपए के स्तर पर प्रवेश किया जा सकता है।
शर्मा ने ‘सीएनबीसी-टीवी18’ को बताया, “निवेशकों को आरएनआरएल जैसे स्टॉक पर नजर रखनी चाहिए। इसमें 102 रुपए के स्तर पर निवेश अच्छा हो सकता है। 106 रुपए के स्तर को अगर यह पार कर उसके ऊपर जाता है तो इसमें नई ऊंचाई देखने को मिलेगी। जिस तरह की स्थिति इस स्टॉक के अंदर बन रही है उसे देखकर ऐसा लगता है कि यह अच्छा करेगा।”
अंदाज टी-20 का, ऊंचाई 20000 की
नई दिल्ली: बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के सेंसिटिव इंडेक्स यानी सेंसेक्स ने सोमवार को तेजी की एक और इबारत लिखी। सेंसेक्स पहली दफा 20 हजार पॉइंट को पार कर गया। हालांकि कारोबार खत्म होने तक यह तेजी बरकरार नहीं रह सकी और सेंसेक्स को 20 हजार के नीचे ही बंद होना पड़ा। फिर भी इसमें 734.50 अंकों की बढ़त रही, जो एक दिन के कारोबार के दौरान हुई अब तक की तीसरी बड़ी बढ़त है। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 5905.90 अंकों पर बंद हुआ। इसमें 203.6 अंकों की मजबूती रही।
उम्मीद में चढ़ा बाजार
ब्लू चिप कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त लिवाली सेंसेक्स को मजबूती देने में मददगार साबित हुई। रिजर्व बैंक मंगलवार को क्रेडिट पॉलिसी रिव्यू करेगा। इससे एक दिन पहले बाजार इस उम्मीद में मजबूत हुआ कि रिजर्व बैंक शॉर्ट टर्म इंटरेस्ट रेट में कटौती करेगा। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक बुधवार को होगी। बाजार में यह चर्चा भी गर्म रही कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व एक दफा फिर से इंटरेस्ट रेट में थोड़ी बहुत कटौती कर सकता है। यूरोप और एशियाई बाजारों में तेजी ने भी बाजार को गति देने में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा कंपनियों के अच्छे तिमाही नतीजों ने भी सेंसेक्स की चमक बढ़ाई।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि स्टॉक मार्केट और विदेशी निवेश से संबंधित सिग्नल पॉजिटिव हैं। इसे देखते हुए सरकार आने वाले दिनों में निवेशकों के लिए उत्साहवर्धक माहौल को बरकरार रखने की हरसंभव कोशिश करेगी।
बाजार का गणित
सेंसेक्स 20024.87 अंक की रेकॉर्ड ऊंचाई तक गया। अंत में यह 3.82 फीसदी की तेजी के साथ 19977.67 पर बंद हुआ। शुक्रवार को यह 19243.17 पर बंद हुआ था। 6 दिनों के कारोबार में सेंसेक्स में 2417.69 अंक यानी 13.77 फीसदी की तेजी आ चुकी है, जो हफ्ते भर में हुई बढ़त का रेकॉर्ड है। उधर, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 203.60 अंकों की तेजी के साथ 5922.50 अंक की नई ऊंचाई को छूने के बाद 5905.90 अंक पर बंद हुआ।
Monday, October 29, 2007
बाजार में तेजी जारी रहने के आसार
नई दिल्ली : देश के शेयर बाजारों में तेजी का सिलसिला इस हफ्ते भी बने रहने की संभावना है। बाजार विश्लेषक शेयर बाजारों की तेजी को लेकर पूरे आशावान लग रहे हैं। उनका मानना है कि बाजार के मौजूदा हालात को देखकर गिरावट की संभावनाएं धूमिल नजर आ रही हैं।
पिछले हफ्ते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स अपने डेढ़ सौ साल के इतिहास में रेकॉर्डतोड़ 1683.19 पॉइंट्स यानी 9.49 परसेंट की बढ़त हासिल कर 19243.17 पॉइंट्स के नए शिखर पर पहुंच गया। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 487 पॉइंट्स यानी 9.33 परसेंट की बढ़त से 5702.30 पॉइंट्स के अभी तक के रेकॉर्ड स्तर पर बंद हुआ।
दिल्ली शेयर बाजार के पूर्व अध्यक्ष और ग्लोब कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड के प्रमुख अशोक अग्रवाल का मानना है कि इस हफ्ते मजबूती को लेकर शंका करने की गुंजाइश नजर नहीं आ रही है। सेबी ने पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) को लेकर जो कदम उठाए हैं, उनका असर बाजार झेल चुका है। सेबी के कदमों से सिर्फ इतना फर्क पड़ सकता है कि देश के शेयर बाजारों में आने वाले विदेशी धन की गति शायद कुछ धीमी पड़ जाए। लेकिन ऐसा कुछ नहीं है कि इन उपायों से विदेशी धन आना ही रुक जाए।
इंटरनैशनल मार्केट में कच्चे तेल की रेकॉर्डतोड़ कीमतों के देश पर पड़ने वाले असर के बारे में अग्रवाल का कहना है कि सरकार डीजल और पेट्रोल के दामों को बढ़ाने के लिए पहले ही मना कर चुकी है। लिहाजा विश्व बाजार में कीमतों में बढ़ोतरी का असर यहां नहीं पड़ेगा।
उनके मुताबिक एनर्जी, स्टील और इंफ्रास्ट्रक्चर की कंपनियों में निवेश की अच्छी संभावनाएं हैं। लेकिन इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी कंपनियों को लेकर वह आशान्वित नहीं हैं। अग्रवाल का कहना है कि अमेरिकी इकॉनमी की मंदी और रुपये की मजबूती आईटी कंपनियों के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
पैन कार्ड होने से टैक्स रिटर्न भरना जरूरी नहीं
मेरा साल 2003-04 का कर निर्धारण करते वक्त इनकम टैक्स अधिकारी ने विदेश से प्राप्त लाभांश पर स्त्रोत पर काटे गए टैक्स का क्रेडिट नहीं दिया। इस वजह से मुझे रिफंड के 32,371 रुपये न देकर 3,63,306 रुपये की डिमांड खड़ी कर दी। जब मैंने धारा 154 में रेक्टिफिकेशन के लिए आवेदन किया तो आयकर अधिकारी ने बताया कि आयकर के प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर में उक्त आयकर क्रेडिट देने का प्रावधान नहीं है और वह धारा 154 में संशोधन कंप्यूटर के द्वारा ही कर सकता है, मैनुअली नहीं। शीघ्र ही आयकर सॉफ्टवेयर में संशोधन होने पर वह उचित आदेश पारित करके मेरा रिफंड जारी कर देगा। अब रिफंड देने के स्थान पर मुझे टैक्स रिकवरी ऑफिसर, रेंज 11 का नोटिस मिला है, जिसमें बकाया आयकर मांगा गया है और न देने पर बैक खाता अटैच करने और अन्य कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। ऐसी स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए, जब जायज रिफंड न देकर अवास्तविक टैक्स मांगा जा रहा है?
संजीव, ई मेल से
आयकर अधिकारी का यह कहना सही नहीं है कि आयकर सॉफ्टवेयर में विदेश में काटे गए टैक्स का क्रेडिट नहीं दिया जा सकता। यह स्थिति इसलिए हुई है, क्योंकि आप तथा आयकर अधिकारी दोनों इसे धारा 90 में टैक्स रिलीफ की गणना करने की बजाय इसका क्रेडिट टीडीएस की तरह चाहते हैं। आयकर अधिकारी को वास्तविक स्थिति का पता होना चाहिए, जिससे ऐसे अवास्तविक कर की मांग न की जाए और करदाता अनावश्यक रूप से परेशान न हो। आप आयकर अधिकारी को पत्र लिखकर सही स्थिति बताकर टीडीएस क्रेडिट की बजाय धारा 90 में टैक्स रिलीफ मांगे। फिर भी समाधान न हो तो दो प्रतियों में ग्रीवेंस कमिश्नर को लिखें।
मेरी पत्नी के नाम बिल और पावर ऑफ अटॉर्नी पर एक मकान है। इससे लगभग 1 लाख रुपये सालाना किराया आता है। मैं बेटे के साथ काम करता हूं। जिससे मुझे साल में लगभग 50 हजार रुपये की आय होती है। मेरा और बेटे का परिवार साथ रहता है। मेरा, पत्नी, बेटा व बहू सभी का पैन कार्ड है। क्या हमें आयकर रिटर्न भरना चाहिए?
अशोक गुप्ता, पत्र द्वारा
पैन कार्ड होने से कर रिटर्न भरना अनिवार्य नहीं होता है। कर रिटर्न भरना तभी जरूरी है जब कर दाता की आय अधिकतम कर मुक्त सीमा से ज्यादा हो, जो पुरुष के लिए 1.10, महिला के लिए 1.45 तथा सीनियर सिटिजन के लिए 1.95 लाख रुपये है। चूंकि आपकी आय इस सीमा से कम है, अत: कर रिटर्न भरना आवश्यक नहीं है।
एकल ब्याज दर व्यवस्था चाहती है रिजर्व बैंेक
मुंबई: मंगलवार को अपनी मानेटरी पॉलिसी पर पुनर्विचार से पहले भारतीय रिजर्व बैंक के सामने ब्याज दर में दुविधापूर्ण स्थिति है। हाल फिलहाल मुद्रास्फीति के अपने पांच साल के सबसे कम स्तर पर पहुंच गई है,जबकि बैंकों में अतिरिक्त लिक्विडिटी की समस्या व्याप्त है।
आरबीआई के गवर्नर व्हाईव्ही रेड्डी अगर ब्याज दर को बढ़ाने का निर्णय करते हैं तो इससे देश की विकास दर प्रभावित हो सकती है, जबकि लगातार आ रहे विदेशी निवेश से बैंकों के सामने तरलता की समस्या विकराल रूप धारण कर रही है।
कुछ बैंकें और अर्थशास्त्री चाहते हैं कि इस शीर्ष बैंक को शार्ट टर्म के लोन में कटौती करना चाहिए, जबकि अन्य आगाह करते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में तेल की बढ़ती कीमतों के कारण मुद्रास्फीति बढ़ने की संभावना है। ऐसे में यह कदम उचित नहीं होगा।
कुछ अर्थशास्त्री कहते हैं कि रिजर्व बैंक को रेपो और रिजर्व रेपो रेट के बीच अंतर खत्म करना चाहिए तो अन्य एकल स्थाई ब्याज दर प्रणाली के पक्षधर है। हालांकि इससे सीआरआर बढ़ सकता है।
क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री सुबीर गोकम ने कहा कि हाल फिलहाल देश के हालात मानेटरी पॉलिसी में बदलाव की ओर संकेत नहीं करते। उन्हें इसमें कुछ खास परिवर्तन की उम्मीद नहीं है। सरकार को एक साल पहले घोषित नीतियों को ही आगे बढ़ाना होगा।
यस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री शुभांदो राव ने कहा है कि सीआरआर बढ़ाया जा सकता है। हालांकि अधिक संभावना इस बात की है कि है कि इस बार आरबीआई कोई विशेष बदलाव ही न करें।
अनिल के पावर को मुकेश अंबानी ने दिया झटका
नई दिल्ली : अनिल अंबानी समूह ने रिलायंस पावर के प्रस्तावित आईपीओ के खिलाफ चल रहे अभियान में रिलायंस इंडस्ट्रीज का हाथ बताया है। रिलायंस एनर्जी ने सेबी को दाखिल शिकायत में वी बालासुब्रrाण्यम, मनोज मोदी, ए शंकर और दीपायन मजूमदार जैसे लोगों के नाम लिए हैं। अनिल समूह को विश्वास है कि जो भी अभियान चलाया गया है, वह रिलायंस इंडस्ट्रीज के समर्थन से चला है। बल्कि रिलायंस एनर्जी का मानना है कि यह सब अनिल समूह की सफलता से जलन के कारण किया जा रहा है।
रिलायंस पावर के प्रस्तावित इश्यू में 50 फीसदी हिस्सेदारी वाली रिलायंस एनर्जी ने कहा, दुष्प्रचार से उसके शेयर का मूल्य चार दिनों में 35 फीसदी गिर गया है। रिलायंस एनर्जी ने इन आरोपों का खंडन किया है कि बिजली परियोजनाए सही अनुमति के बिना ही रिलायंस पावर को सौंप दी गई है, इससे शेयरधारकों को नुकसान हुआ है।
कलह की वजह से फोब्र्स में अंबानी बंधु अब तक दौलत की वजह से फोब्र्स में जगह बना रहे थे, अब झगड़े की वजह से उनका नाम फोब्र्स की ‘अरबपति परिवारों के झगड़ों’ की सूची में है। 2005 में रिलायंस इंडस्ट्रीज और रिलायंस पावर की साझा नेटवर्थ 7 अरब डॉलर थी। फोब्र्स की मार्च 2007 की अरबपतियों की सूची मे मुकेश को 20.1 अरब डॉलर के साथ 14वां स्थान और अनिल को 18.2 अरब डॉलर के साथ 18वां स्थान मिला था।
फोब्र्स की रिपोर्ट का कहना है कि दोनों भाइयों ने 2004 में ही सार्वजनिक झगड़ा शुरू कर दिया था। जब स्थिति ज्यादा बिगड़ गई तो उनकी मां कोकिलाबेन ने शांति स्थापित करने का प्रयास किया। कभी जुदा न दिखने वाले दोनों भाइयों के बीच महीनों तक संघर्ष चला। फोब्र्स का कहना है कि अब भी दोनों के बीच झगड़ा चल रहा है।
फोब्र्स ने लिखा है कि अनिल कई मौकों पर मुकेश को अदालत में ले गए हैं। गैस आपूर्ति के मसले पर विवाद लंबा चला है। करीब चार महीनों में दोनों भाई किसी समझौते पर पहुंच सके हैं।
Saturday, October 27, 2007
सेबी ने किए एक तीर से दो शिकार
नई दिल्ली : पार्टिसिपेटरी नोट (पीएन) पर सेबी ने जो 'गुगली' फेंकी है, उसका जवाब फिलहाल फॉरेन इंस्टिट्यूशनल इनवेस्टर (एफआईआई) के पास नहीं है। सेबी ने स्पॉट कारोबार में पीएन को जारी रखकर साफ कर दिया कि उसकी मंशा विदेशी इनवेस्टमेंट को रोकने की नहीं है। डेरिवेटिव कारोबार में पीएन पर रोक लगाकर उसने शेयर बाजार में काला धन आने का रास्ता बंद कर दिया। सेबी के इस चाल पर एफआईआई पसोपेश में हैं। इसलिए उन्होंने शुक्रवार को शेयरों में तेजी बनाए रखी और सेंसेक्स नई ऊंचाइयां छूने में कामयाब रहा। एफआईआई के इस पॉजिटिव रूप को देखते हुए सरकार भी सकते में आ गई। वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम को नॉर्थ ब्लॉक के कार्यालय से बाहर आकर कहना पड़ा कि सेबी के निर्णय का शेयर बाजार पर क्या प्रभाव पडे़गा, इस बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
डेरिवेटिव कारोबार
शेयर बाजार में 2 तरह के कारोबार होते हैं। वायदा कारोबार और नकद कारोबार। वायदा कारोबार को ही डेरिवेटिव कारोबार कहा जाता है। वायदा कारोबार भविष्य का कारोबार कहलाता है। शेयरों का सौदा वर्तमान मूल्य होता है पर इसकी डिलिवरी 90 दिनों बाद की जाती है। शेयर खरीदने वाला तय मूल्य का 10 से 15 फीसदी मार्जिन मनी देकर सौदा कर लेता है। बाकी राशि तय समय पर दी जाती है। सेबी की जांच रिपोर्ट के अनुसार पीएन के जरिए सबसे अधिक निवेश वायदा कारोबार में हो रहा था। इसका कोई हिसाब-किताब सेबी के पास नहीं है।
स्पॉट कारोबार
इसे नकद कारोबार भी कहते है। शेयर खरीदने पर तुरंत राशि का भुगतान करना होता है। तय नियम के अनुसार एफआईआई अपने कुल नेटवर्थ का 40 फीसदी निवेश पीएन के जरिए स्पॉट कारोबार में कर सकते हैं। स्पॉट कारोबार का ब्यौरा सेबी को आसानी से मिल जाता है। यही कारण है कि सेबी ने इसमें पीएन के जरिए निवेश को जारी रखा है।
ब्लैक या वाइट
सेबी के अध्यक्ष एम. दामोदरन का कहना है कि शेयर बाजार में ब्लैक मनी नहीं आ रहा है। सरकार शेयर बाजार में मनी फ्लो नियंत्रित करना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि डेरिवेटिव कारोबार में पीएन पर रोक सीधे तौर पर ब्लैक मनी पर रोक है। एसबीआई म्यूचुअल फंड के प्रमुख संजय सिन्हा का कहना है कि काले धन की परिभाषा है, वह रकम जिसके बेस की जानकारी न हो। डेरिवेटिव कारोबार में पीएन के जरिए ही बेनामी पैसा आ रहा था। सेबी ने उसी पर लगाम कसी है।
एफआईआई खुश या नाखुश!
बाजार विशेषज्ञों की मानें तो एफआईआई इससे नाखुश होंगे। सेबी के निर्णय को लेकर रणनीति बना रहे हैं। वैल्यू रिसर्च के प्रमुख धीरेंद्र कुमार का कहना है कि शेयर कारोबार के आंकड़ों के अनुसार एफआईआई ने पिछले कुछ माह में करीब 4 खरब डॉलर का कारोबार किया। इसमें 50 फीसदी से ज्यादा डेरिवेटिव में पीएन के जरिए किया गया, सेबी ने उस पर रोक लगा दी है। इससे उनको झटका तो लगेगा। यह नाखुशी देर-सवेर खुलकर सामने आ सकता।
विश्व बाजार में सोना 28 वर्ष के नए उच्च स्तर पर
नई दिल्ली: डालर की ढुलमुल स्थिति, कच्चे तेल की रिकार्ड कीमतों और वैश्विक शेयर बाजारों की उठापटक के बीच अंतर्राष्ट्रीय धातु बाजारों में सोना आज पिछले 28 goldवर्ष के नये उच्च स्तर पर पहुंच गया।
टोक्यो से प्राप्त समाचारों क अनुसार हाजिर कारोबार में सोना 778.25 डालर प्रति ट्राय औंस के उच्च स्तर पर बोला गया जो जनवरी 1980 के बाद का अधिकतम भाव है। न्यूयार्क में कल कारोबार की समाप्ति पर सोना 767.90-768.70 डालर प्रति ट्राय औंस था।
विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था अमरीका की मंदी और अगले बुधवार को केन्द्रीय बैंक फैडरल रिजर्व के ब्याज दरों में चौथाई प्रतिशत और कटौती की प्रबल संभावनाओं के बीच मौजूदा माहौल में निवेशकों के लिए सोने में धन लगाना सबसे सुरक्षित माना जा रहा है। फैडरल रिजर्व ने देश की अर्थव्यवस्था की मंदी को देखते हुए पिछले माह बैठक में ब्याज में आधा प्रतिशत की कटौती की थी। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकार्ड पर रिकार्ड बना रही हैं। यूएस क्रूड फ्यूचर 92.22 डालर प्रति बैरल के नए शिखर पर पहुंच गया।
सिंगापुर से मिले समाचारों में भी सोना वहां जनवरी 1980के बाद के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। सिंगापुर में हाजिर कारोबार में सोना 772.90 डालर प्रति ट्राय औंस तक बोला गया। जनवरी 1980 में कच्चे तेल की कीमतों के एक वर्ष के भीतर दोगुनी हो जाने के परिणामस्वरुप सोना वायदा भाव 873 डालर प्रति ट्राय औंस तक पहुंच गया था।
पी-नोट का आकलन जल्दबाजी-चिदंबरम
बाजार नियामक (सेबी) द्वारा भागीदारी पत्र (पी-नोट) के जुड़े मानदंड सख्त करने के एक दिन बाद सरकार ने कहा कि इसके प्रभाव का आकलन करना अभी जल्दी होगी, लेकिन उन्होंने साथ ही निवेश को प्रभावित किए बिना पूँजी प्रवाह को नियंत्रित करने के कदम का समर्थन किया।
वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि मैंने कहा है कि पूँजी प्रवाह में तेजी से हो रही बढ़ोतरी से हम चिंतित हैं। निवेश को प्रभावित किए बगैर हम चाहेंगे कि पूँजी के प्रवाह को नियंत्रित किया जा सके। सेबी ने कुछ कदम उठाए हैं। इनका क्या प्रभाव पड़ता है, इसे देखने के लिए हमें इंतजार करना पड़ेगा।
हालाँकि चिदंबर में इस बारे में प्रतिक्रिया जाहिर करने से इनकार कर दिया कि भारतीय रिजर्व बैंक या सरकार पूँजी प्रवाह रोकने के लिए कोई कदम उठाएगी या नहीं।
शेयर बाजार में शुक्रवार को आए उछाल के बारे में पूछने पर वित्तमंत्री ने कहा हम रोजाना शेयर बाजार की स्थितियों की निगरानी नहीं कर सकते। बंबई शेयर बाजार के संवेदी सूचकांक ने आज फिर से जोरदार लिवाली के कारण 19000 का स्तर छुआ।
चिदंबरम ने कहा कि पी-नोट के बारे में सेबी की पहल का मकसद था पूँजी प्रवाह को नियंत्रित करना। सेबी ने कल नए नियमों की घोषणा की ताकि विदेशी संस्थागत निवेशकों और उनके सब अकाउंट्स को वायदा आधारित ताजा पी-नोट जारी करने से रोका जा सके और वे मौजूदा पोजीशन को अगले 18 महीनों में समेट लें।
ऊंचे ब्याज दरों वाली विशेष जमा योजनाएं बंद होंगी
मुंबई: रिजर्व बैंक ने ऊंची ब्याज दरों व कई शर्तो वाली विशेष जमा योजनाएं (स्पेशल डिपाजिट स्कीम) तत्काल बंद करने को कहा है। बैंक ज्यादा डिपाजिट जुटाने के लिए सामान्य ब्याज दरों से ज्यादा ब्याज वाली योजनाओं के जरिए धन बटोरते हैं। इन योजनाओं में लॉक इन पीरियड के अलावा कई निषेधात्मक शर्ते होती हैं। बैंक 300 दिनों से लेकर पांच साल तक की लाक इन अवधि वाली योजनाएं चलाती हैं, जिन पर 6 से 12 माह की लाक इन अवधि होती है। अगर कोई लाक इन अवधि से पहले ही धन निकालता है तो उसे ब्याज की पूरी राशि से हाथ धोना पड़ता है। कई बैंक डिपाजिट का आंशिक भुगतान भी उपलब्ध कराते हैं।
रिजर्व बैंक ने बैंकों से कहा है कि ब्याज दरों के मामले में उन्हें निर्देशों का पूरा पालन करना चाहिए। कोई भी बैंक समान तारीख और समान राशि के डिपाजिट की दरों में भेदभाव नहीं कर सकता।
क्या होगा:
बैंकों को रिजर्व बैंक के निर्देशानुसार जल्दी ही स्पेशल डिपाजिट स्कीम बंद करनी होंगी। बैंक सामान्य जमा योजनाओं और स्पेशल योजनाओं में अंतर नहीं कर सकते हैं। सीनियर सिटीजन और 15 लाख रुपए या उससे ज्यादा के डिपाजिट को इससे बाहर रखा जाएगा।
किस पर एतराज:1. रिजर्व बैंक को सबसे ज्यादा एतराज ऐसी योजनाओं में समय पूर्व निकासी पर ब्याज जब्त करने को लेकर है। यह रिजर्व बैंक के नियमों व निर्देशों के प्रतिकूल है।
2. कई बैंक, जिनमें सरकारी लेंडर भी शामिल हैं, ऐसी डिपाजिट योजनाएं चला रहे हैं। इन योजनाओं के लाक इन पीरियड भी अलग-अलग हैं। समय से पहले व्रिडाल की स्थिति में बैंक संग्रहीत ब्याज भी जब्त कर लेते हैं।
3. स्पेशल स्कीम में दी गई ब्याज दरें सामान्य डिपाजिट स्कीमों की तरह नहीं होती हैं।
4. बैंक ऐसी योजनाए